"यह धरा कितनी बड़ी है ,एक तुम क्या एक मैं क्या ? दृष्टि का विस्तार है यह ,अश्रु जो गिरने चला है , राम से सीता अलग हैं ,कृष्ण से राधा अलग हैं , नियति का हर न्याय सच्चा ,हर कलेवर में कला है..!"
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