अपने हिस्से की जिंदगी तो हम जी चुके, अब तो बस धरकनो का लिहाज करते हैं। क्या कहे ये दुनिया वालो को, जो आखरी सांस पर भी एतराज करते हैं।।
A conversation in words
0 commentsLog in to join the conversation.