की मेरी आंखों का प्रस्ताव ठुकरा के तुम मुझसे यूं ना मिलो अजनबी की तरह, अपनी होठों से मुझको लगा लो अगर बजे उठूंगा मैं फिर बांसुरी की तरह।।
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