आज मैं लिखुंगा ,
अपनी जिंदगी की कहानी !
कत्ल कैसे हुआ मेरा ,
और बर्बाद हुई रूवानी !
मैं खेलता था अल्फाजों से ,
किसी ने मेरे दर्द कि बना दि कहानी !
शोले जलते दिल में ,
और बची थी जावानी !
थोड़ा रूको साहब मैं बताऊगा ,
अपने उबलते रक्त की कहानी ।
यह बात तब की है ,
जब शुरू हुई थी मेरी जवानी !
मैं अकेला बहुत था जिंदगी में ,
और लिखना चाहता था अपनी कहानी !
जिल्लत भरी जिंदगी थी मेरी ,
और रुसवाई की तन्हाई !
टुकड़ों में जब बटा खुद को,
सबने की सराहनी !
अल्फाज मेरे नोच खा गए गिद्ध ,
अब क्या बताऊ अपनी कहानी !
मजे लेते लोग सभी ,
हँसती भीड़ की कहानी !
पर कामयाब तभी होंगा ,
जब बदल लू वक्त अपना !
फिर मैं लिखुंगा ,
अपने बदलते वक्त की कहानी !
भाई का छोटा भाई की ,
दुनिया होगी दिवानी !
फिलहाल मैं शून्य हूँ....
जल्द ही लिखुंगा ,
अपने अनंत की कहानी !
फिलहाल मैं शून्य हूँ....
जल्द ही लिखुंगा,
अपने अनंत की कहानी...✍️
~भाई का छोटा भाई
A conversation in words
0 commentsLog in to join the conversation.