खुश तो था मगर इस साल नही ,
चुप रहो अब कोई सवाल नही ,
तुम होते तो दुनिया जीतता मैं ,
तुम मेरे उरूज थे जवाल नही ,
खुश तो था मगर इस साल नही ,
गिरा हूँ मैं तो उठ भी जाऊँगा ,
अजनबी मुझको तू संभाल नही ,
तुम्हे आसांन लगता है बिखरना ,
मेरे जैसा तुम्हारा हाल नही ,
खुश तो था मगर इस साल नही ,
तुम्हारी खुशियां जरूरी हैं यार ,
मैं जख्म लेकर ही ठीक हूं ,
मुझे गम का कोई मलाल नही ,
खुश तो था मगर इस साल नही ,
मैं बंदा गलत हूं सोचता भी गलत हू ,
पर कभी खुद से करता सवाल नही,
खुश तो था मगर इस साल नही ,
अपनों के चक्कर में अपने को ही खो दिए ,
जैसे कोरोना महामारी में हर कोई रो दिए,
अब कैसे कहूं कि जिंदगी में बवाल नहीं ,
खुश तो था मगर इस साल नही ,
जख्म देते हो कहते हो सीते रहो ,
जान लेकर कहोगे कि जीते रहो ,
मैं भाई का छोटा भाई अपना जज्बात लिख रहा हूं ,
पर उस पर कोई सवाल नहीं ,
खुश तो था मगर इस साल नही ,
खैर छोड़ो....!
~भाई का छोटा भाई
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