मेरे दोस्त पढ़ लिखकर भी बेरोजगार हो गए.....
मैं लिखना तो नहीं चाहता था ,
लेकिन लिखने में मजबूर हो गया ,
जैसे मेरा दोस्त बाहर पढ़ने गया और हमसे दूर हो गया ,
इतना पढ़ लिख कर भी ,
मेरा दोस्त बेरोजगार हो गया ,
क्या बीतती होगी मेरे दोस्त पर ,
अब वह लाचार हो गया ,
क्या बताऊं साहब
कि मेरा दोस्त पढ़ लिखकर भी बेरोजगार हो गया ,
क्या सपना बुने होंगे उसके घर वालों ने ,
अब वह सब बेकार हो गए ,
कैसे बताऊं साहब
कि पढ़ लिखकर मेरे दोस्त बेरोजगार हो गए ,
कंपटीशन इतना बढ़ गया इस जमाने में ,
कि बड़ा मुश्किल हो गया कमाने में ,
शिक्षा पैदा कर रही शिक्षित बेरोजगार,
चपरासी पद के लिए भी हो रही मारामार ,
अगर एक जगह चपरासी की आती हैं
तो हजारों इंजीनियर और other educated लाइन लगाते हैं ,
वाह रे वक्त कैसे कैसे दिन दिखाते हैं ,
उसने भी सिलेक्शन नहीं हुआ दोस्त का और दोस्त लाचार हो गया,
कैसे बताऊं साहब
की पढ़ लिखकर मेरा दोस्त बेरोजगार हो गया ,
दुनिया वाले ऐसे देखते हैं ,
जैसे पढ़ लिखकर उससे गुनाह हो गया ,
कैसे बताऊं साहब
कि पढ़ लिखकर मेरा दोस्त को लेकर बेरोजगार हो गया ,
आजकल के तो नए युवाओं का पढ़ने लिखने से भी जी कतरता है ,
क्योंकि उनको पता है कि पढ़ लिखकर बंदा बेरोजगार हो जाता है ,
बेरोजगारी से युवाओं का हौसला टूट रहा है ,
इस लिए रोज सुबह, युवाओं का गुस्सा फूट रहा है ,
पर क्या करें अब तो वो लाचार हो गए ,
कैसे बताऊं साहब
की पढ़ लिखकर मेरे दोस्त बेरोजगार हो गए,
मां बाप के बेटे की पढ़ाई में घुटने जवाब दे गए,
अब मॉ बाप भी क्या करते साहब,
बेटे तो पढ़ लिखकर बेरोजगार हो गए ,
जब कुछ नहीं हुआ तो फिर से एक बार,
SSC का उम्मीदवार हो गया ,
कैसे बताऊं साहब
कि पढ़ लिखकर मेरा दोस्त बेरोजगार हो गया ,
भाई का छोटा भाई कलम डायरी पर रखा तो स्याही रोकर पार हो गया ,
कैसे बताऊं साहब
की पढ़ लिखकर मेरा दोस्त बेरोजगार हो गया ,
की पढ़ लिखकर मेरा दोस्त बेरोजगार हो गया....✍️
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