न मालूम राहें कौन सी थी
किधर किधर गया हूँ मैं
बच के चला तौहमतों से
अपनी नज़रों में गिर गया हूँ मैं
रास्ते बड़े कठिन हैं
सुनता आया हूँ मैं ज़मानों से
पर पसार उड़ चला हूँ
बात करता हूँ आसमानों से
कबूतरों सी रही उड़ान मेरी
बाजों से घिर गया हूँ मैं
बच के चला तौहमतों से
अपनी नज़रों में गिर गया हूँ मैं
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