कल मैं नीद मे था तब,
एक झलक ज़िन्दगी को देखा ,
वो मेरी राह में गुनगुना रही थी ,
मैंने उसको ढूंढा उसे इधर उधर ,
वो सहला कर मुझे सुला रही थी ,
मुझे ज़िन्दगी क्यो देती है इतना दर्द,
मैं उसे और वो मुझे बता रही थी ,
मैंने पूछा तुने मुझे ये दर्द क्यों दिया
उसने कहा मैं ज़िन्दगी हु तुझे जीना सिखा रही थी ,
मैंने कहा जीना कहा मै तो घुट घुट कर मर रहा हूं ,
ये ज़िन्दगी मुझे माफ कर दे,
अब मैं जीने से डर रहा हूँ,
मैं अपने ही जज्बातों को लिख लिख कर पढ़ रहा हूं ,
थक गया जी जी के ए जिंदगी मुझे माफ कर दे ,
अब मैं जीने से डर रहा हूं ,
जख्म भरा शरीर लेकर मैं ऐसे ही धीरे-धीरे मर रहा हूं ,
ए जिंदगी मुझे मौत दे दे ,
अब मैं जीने से डर रहा हूं ,
वक्त सही नहीं है इसलिए मैं भाई का छोटा भाई लिखने से भी हर रहा हूं ,
ए जिंदगी मुझे मौत दे दे,
अब मैं जीने से डर रहा हूँ ,
ए जिंदगी मुझे मौत दे दे,
अब हम जीने से डर रहा हूं...✍️
~भाई का छोटा भाई
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