छुपानी पड़ती है दिल की सच्चाई कभी कभी , बहुत बुरी लगती है ये अच्छाई कभी कभी , लोग पूछते हैं तू अपने बारे में कुछ बताता क्यों नहीं , सच सच अपनी जिंदगी को जताता क्यों नहीं , हर पल जख्म गम लिखता रहता है , तू दो पल हंस कर बिताता क्यों नहीं , सब के बारे में लिखता रहता है , तू अपने बारे में कब लिखेगा , जब दुनिया तुझे गलत समझ जाएगी , क्या तब तू सीखेगा , मैं गलत हूं कि सही मैं खुद ही खुद को परखूंगा , यह दुनिया है दोस्त भगवान को भी बुरा कहती है , अगर यह दुनिया एक दर्द सहती है , तो 1000 लफ्ज़ भगवान को गलत कहती है , खैर छोड़ो ये तो इंसान हैं , अब इंसानों में इंसानियत कहां रहती है , मुझे गलत समझने वाले समझ जाओ , तुम्हारी समझदारी ही इतनी है , मैं अपनी अच्छाई के बारे में क्या लिखूं , जितना तुम समझ गए मुझे , औकात ही तुम्हारी उतनी है, खैर छोड़ो साहब , बहुत सारी बातें बता दिया , भाई का छोटा भाई अपने बारे में जता दिया , हर वक्त लिखता था अपनी जिंदगी का गम , आज इस कविता में खुद को ही अजमा दिया....✍️
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