(बाप जी) भाईं तेरी यादें ,
वाह क्या किया करते थे वादे,
तू तो जैसे गुलाब का फूल हो गया ,
भाई एक बार बताना तो क्या मुझसे भूल हो गया ,
आखिर क्यों नहीं उठाता मेरा फोन ,
क्या नहीं बजती तेरे मोबाइल में रिंगटोन ,
या फिर ज्यादा बिजी है तो समय नहीं मिलता ,
जैसे गर्मियों में फूल नहीं खिलता ,
भाई इतना एटीट्यूट भी ठीक नहीं ,
दो शब्द बात करने को ही तो बोल रहा हूं ,
तुझसे माग रहा भीख नहीं ,
आखिर क्यों मेरे संदेश को देख कर भी अनदेखा कर देते हो,
क्यों रिप्लाई में एक शब्द नहीं लिख देते हो ,
मैं ज्यादा व्यस्त हूं ,
मैं तुझसे बात करूं मैं वो नहीं शख्स हू ,
आखिर क्यों नहीं लिख देते,
कि मुझमे अब वो बात नहीं ,
वादा किया करता था जो अब वो रात नहीं,
वाह सचिन दादा आपकी बात ही निराली है ,
क्या लिखूं आपकी तारीफ में ,
मेरी तो जुबान भी काली है,
मैं तो उस गुलाब के कांटे जैसे हू ना कि फूल ,
आपका एटीट्यूड जायज है मुझसे ही हो गई भूल ,
हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं अब मुझे माफ कर देना ,
यह अपना एटीट्यूड किसी लड़की को दिखाना,
मेरे पास कुछ अल्फाज नहीं था बाप जी,
इसलिए आपके बारे में गलत ही जता रहा हूं,
बुरा मत मानना भाई मैं पहले से बता रहा हूं....✍️
~भाई का छोटा भाई
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