अर्खुब भरे दर्द ज़मानें रह गए... हम ईंशानीयत का फर्ज निभाने में रह गए , तुम सब चुपके से आकर हमारे घर में आग लगाते रहे ... और हम तुम्हारे ही घर कि आग बुझाने में रह गए !
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