काटे नहीं कटते लम्हे इंतज़ार के, नजरें बिछाए बैठे हैं रस्ते पे यार के, दिल ने कहा देखे जो जलवे हुस्न-ए-यार के, लाया है उन्हें कौन फलक से उतार के।
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