Skip to content
ShayariBooksA home for words.
Poetry · 1 chapter

Hum desh nahi batne denge

Chapter 1

हम देश नहीं बंटने देंगे।

हम खेल जायेंगे खून की होली पर देश नहीं बंटने देंगे। कश्मीर शीश है भारत का हम शीश नहीं झुकने देंगे। अबकी कश्मीर के हमलावर को हम ऐसा सबक सिखा देंगे। हमलावर की क्या हस्ती है उसका पूरा देश मिटा देंगे हम उनके घर में जाकर उनकी छाती पर तिरंगा लहरा देंगे। हम खेल जायेंगे खून की होली पर देश नहीं बंटने देंगे। कश्मीर शीश है भारत का हम शीश नहीं झुकने देंगे। याद रखो भारत पर बुरी निगाह रखने वालों समझौता बार-बार नही होगा। अबकी बार युघ्द सीघा आर पार का होगा गोली मारेंगे जाकर सीघा दुश्मन की छाती पर। याद रखो भारत के सिंहों के द्वारे पर कोई समझौता अबकी बार नहीं होगा। भारत की रक्छा के खातिर हम अपना शीश कटा देंगे। लेकिन मरने से पहले दुश्मन का भूगोल मिटा देंगे। हम खेल जायेंगे खून से होली पर देश नहीं बंटने देंगे। कश्मीर शीश है भारत का हम शीश नहीं कटने देंगे। हेमन्त कुमार मिश्रा