शिक्षाप्रद
बहुत जरूरी होती शिक्षा,
सारे अवगुण धोती शिक्षा |
चाहे जितना पढ़ ले हम पर,
कभी न पूरी होती शिक्षा |
शिक्षा पाकर ही बनते है,
नेता, अफसर, शिक्षक |
वैज्ञानिक, मंत्री, व्यापारी,
और साधारण रक्षक |
कर्तव्यों का बोध कराती,
अधिकारों का ज्ञान |
शिक्षा से ही मिल सकता है,
सर्वोपरि सम्मान |
बुद्धिहीन को बुद्धि देती,
अज्ञानी को ज्ञान |
शिक्षा से ही बन सकता है,
भारत देश महान ||
डॉ० परशुराम शुक्ल
प्यारे बच्चो पढ़ो पढ़ो कुछ,
जीवन में तुम गढो गढो कुछ |
समय नहीं फिर मिल पायेगा |
जीवन असफल हो जायेगा |
सीखो तुम कुछ करना श्रम,
जो भी करलो समझो कम |
पूरा जग हो तुमसे नीचा,
ऐसा कार्य करो तुम ऊँचा |
पढ़ लिख कर बनो विद्वान् |
दूर दूर तक होवे सम्मान |
ऐसी पूँजी है यह शिक्षा,
कभी मांगनी पड़े न भिक्षा |
बढ़ जाता है इससे ज्ञान,
नत मस्तक होता अज्ञान |
दूर करो मन का अँधियारा,
फिर लाओ जग में उजियारा ||
मुख़्तार अहमद अं
विद्या का मंदिर विद्यालय,
विद्या का धन देता है |
विद्या देकर बच्चो के यह,
अवगुण सब हर लेता है |
अच्छी अच्छी शिक्षाओ से,
ज्ञान विवेक बढ़ाता है|
इसी ज्ञान के बल पर बच्चा,
आगे बढ़ता जाता है