हर तड़पते हुए लम्हे बिताए है हमने हर खुशी पर गम के आंसू बहाए हैं हमने बर्बादी का जश्न तो जमाना मनाते रहे अपने ही जख्मों पर नमक लगाया है हमने शायर जख्मी दिलीप
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