ना हम रहे दिल लगाने के काबिल ना दिल रहा गम उठाने के काबिल लगे उसके यादों के जख्म दिल पर इस कदर ना छोड़ा उन्होंने फिर हमे मुस्काने के काबिल शायर Jakhmi Dilip
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