बात जब इज्जत की आ जाये तो दोस्ती और प्यार दोनों छोड़ देना चाहिए , क्या खूब कहा है किसी शायर ने खुद पर वार के फेके है ऐसे वैसे बहोत मेरा गुरुर सलामत रहे तेरे जैसे बहोत ||
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