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Bewafa Shayari · A moment in words

Bewafa Shayari

तुम जलाकर दिये, मुँह छुपाते रहे, चाँद घूँघट घटा का उठाता रहा ! तुम न आए, हमें ही बुलाना पड़ा, मंदिरों में सुबह-शाम जाना पड़ा !! लाख बातें कहीं मूर्तियाँ चुप रहीं, बस तुम्हारे लिए सर झुकाता रहा ! दुख यही है हमें तुम रहे सामने, पर दिया प्यार का, काँपता रह गया !!

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