मयखाने मे छलकता शराब लीये बैठा हूँ मैं । किसी की याद में उनकी तस्वीर को सीने से लगाए बैठा हूँ मैं । मुझे मालुम है नही आएगी ओ मेरे जनाजे में । फिर भी अपनी अर्थी को सड़क पर सजाए बैठा हूँ मैं । By- S. Deepak Bhardwaj Singh
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