किसी के हाथ का कंगन खनक ना भूल बैठा है कोई सिंगार करके भी महकना ना भूल बैठा है चले आए हो जब से छोड़ कर तन्हा किसी को तुम अब उसके सर के आंचल भी सरकाना ना भूल बैठा है।।
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