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Dard Bhari Shayari · A moment in words

Dard Bhari Shayari

मुझे इश्क ना सिखा तुझसे बेहतर हूं मैं, पगली जिस स्कूल से तू पढ़कर आई उसका टीचर हूं मैं। मेरी कश्ती का सहारा है तू, किसी और का नही सिर्फ हमारा है तू, मै कितना पागल था जो तुझ पर हक जताता रहा पूरे शहर में तुझको अपना बताता रहा,, लौट कर शाम को जब आया मै घर, गैर की बाहों में उसको देख गया मैं डर, फिर ज़हन में ये सवाल आया, दिल को थोड़ा सा बहलाया, यार का घर तो पीछे ही छोड़ आया, अब क्यों रो रहा पागल मैंने तो पहले ही दिल तोड़ आया। घर उसका पीछे ही छोड़ आया।

A conversation in words

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