कैसे कह दूँ की सरकार गुनाहगार नहीं है...क़ातिल है मगर हाथों मे तलवार नहीं है कितने घरों के चिराग बुझ गये एक पल में...ऐसे जुर्म पे भी हुकूमत शर्मसार नहीं है।
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