कहीं अंधेरा तो कहीं शाम होगी, मेरी हर ख़ुशी तेरे नाम होगी, कभी मांग कर तो देख हमसे ए दोस्त, होंठो पर हसीं और हथेली पर जान होगी।
A conversation in words
0 commentsLog in to join the conversation.