मासूम है लहजा उसका और भोली सी सूरत है
नाज़ुक बदन तराशा हुआ वो बहुत खूबसूरत है
रब ने बनाया है उसको कुछ इसतरह सलीक़े से
कायनात बसती है उसमें खुशियों की इनायत है
ख़्वाहिशों से आँख भरी है दिल मुहब्बत से भरा
हर इक बात दुआ लगती है जैसे कोई इबादत है
टूट गए हैं सब पैमाने अदा अंदाज़ मुख़्तलिफ़ है
बेहिसाब हुस्न की मल्लिका या कोई क़यामत है
बच्चों सी मुस्कान उसकी, बच्चों सी भोली बातें
बच्चों सी अठखेलियाँ कुछ बच्चों सी शरारत है
किससे मुहब्बत है उसको, किसके मुक़द्दर में है
न मालूम दुनिया की बातें वो बस मेरी ज़रुरत है
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