आ जाओ किसी रोज तुम्हारी रूह में उतर जाऊँ, साथ रहूँ मैं तुम्हारे न किसी और को नज़र आऊँ, चाहकर भी मुझे छू न सके कोई इस तरह, तुम कहो तो यूँ तुम्हारी बाहों में बिखर जाऊँ।
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