मधुशाला तेरे नयन , देखत आये चैन । तिरछे नयनो से पिला, क्यो करती बैचेन।। खिडकी खोली आत्म की,पल मे बीती रैन। जो डूबा पाया वही , प्रेम डगर चल चैन।।
A conversation in words
0 commentsLog in to join the conversation.