लाख मुखड़े मिले और मेला लगा, रूप जिसका जँचा वो अकेला लगा ! एक दिन क्या मिले मन उड़ा ले गए, मुफ़्त में उम्र भर की जलन दे गए !! रोज़ घूँघट न कोई उतारा करे, बात हमसे न कोई दुबारा करे ! मन दुबारा तिबारा पुकारा करे !!!
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