Romantic Shayari

Posted On: 08-04-2023

وفا دل میں جگا کر ہے دکھانا اسے اپنا بنا کر ہے دکھانا ملے گی زندگی اس کے ہی در سے وہیں تو سر جھکا کر ہے دکھانا غزل ہے وہ غزل بھی خوب صورت سو اس کو گنگنا کر ہے دکھانا ادائے بے رخی آخر کہاں تک کبھی تو مسکرا کر ہے دکھانا یہی باسط محبت کی ہے طاقت ذرا نظریں اٹھا کر ہے دکھانا باسط ادیب

"आशा " मुश्किल वक़्त में ही तो हमें अपनो की पहचान होती है कौन है साथ आपके खड़े और कौन आपके साथ नहीं है मुश्किल वक़्त इस बात का अच्छे से आभास कराता है कौन है दुख के साथी यहां आपके बस तो है और कौन सुख के साथी केवल हमारे ये वक्त बताता है मुश्किलो से पार कर हमेशा साहस की अनुभूति होती है मुश्किल घड़ी में हिम्मत ही सदा साथ हमारा तो देती है मुश्किल वक़्त जीवन में आते जाते ही सदा रहते हैं मुश्किलो से जूझ के ही हम हर मंजिल पार तो करते है जब भी आए मुश्किल वक़्त आपा ना हम कभी खोए है कहता ये मुश्किल वक़्त आत्मविश्वास का दीप जलाए है मुकाबला करे मुश्किल घड़ी का ना टुटने दे आशा को है।

तुमको दे दी है इशारों में इजाज़त मैंने, माँगने से न मिलसकूं तो चुरा लो मुझको।

तुम्हारी खुशियों के ठिकाने बहुत होंगे मगर, हमारी बेचैनियों की वजह बस तुम हो।

नजर से नजर को मिलाओ नजर का ऐतबार करो, हम तुम से सनम और तुम हम से प्यार करो, तुम जो रूठो तो कुछ भी करके मनाएं तुमको, हम जो पल भर को जायें तो तुम इंतज़ार करो।

मेरे हाथों की लकीरों में समाने वाले, कैसे छीनेंगे तुझे मुझसे ज़माने वाले।

सामने बैठे रहो दिल को करार आएगा, जितना देखेंगे तुम्हें उतना ही प्यार आएगा।

मेरे वजूद में काश तू उतर जाए, मैं देखूं आइना और तू नजर आये, तू हो सामने और वक्त ठहर जाए, और तुझे देखते हुए जिंदगी गुज़र जाए

कभी लफ्ज़ भूल जाऊं कभी बात भूल जाऊं, तूझे इस कदर चाहूँ कि अपनी जात भूल जाऊं, कभी उठ के तेरे पास से जो मैं चल दूँ, जाते हुए खुद को तेरे पास भूल जाऊं।

इससे ज़्यादा तुझे और कितना करीब लाऊँ मैं, कि तुझे दिल में रख कर भी मेरा दिल नहीं भरता

'' साथ नहीं कुछ जाये तेरे '' साथ नहीं कुछ जाये तेरे , सब यहीं रह जाना हैं , पल में क्या हो जायें प्यारे , कल का नहीं ठिकाना है , दुष्प्रवृत्तियाँ पनप रहीं हैं , वे परवाह जमाना है , व्यसनों की भरमार यहाँ पे , अपनों को समझाना है , मानव अपने जीवन से , करता है खिलवाड़ यहाँ, दुरव्यसनों को नहीं छोड़ते , लिये धर्म की आड़ यहाँ , अत्याचारी बढ़ते जाते , बढ़ते अत्याचार यहाँ , बिभचारियों की कमी न , करते है बिभचार यहाँ , जैसी करनी वैसी भरनी , सोंच समझ पग धार यहाँ , सम्हल गया तो सब बनजाये , वर्ना सब वैकार यहाँ , 'चंचल' अपने जीवन में , करो सदा उपकार यहाँ , भले बुरे का निर्णय होता , कर्मो के आधार यहाँ , © दिल की बात शायरी से

' AUR MAI MIL JAAUN TUMSE ' Ek Alam kuch yu aaye , Ek jahaan kuch esa ho Na Baat ho Zaat-Paat ki , Na Kagaz ke unn tukdo se , Ishq ke mukaddar ka Faisla ho Aur mai Mil jaaun tumse Inaayat kuch esi uss Rab ki mujhpe ho jaaye Jo dekhu kisi bi nazaare ko mai To bas tera chehra nazar aa jaye Aur Mai Mil jaaun tumse Jab Doob jaao tum Gehri neend mei Nigaahein meri Bas tumpe theher jaaye Fir toote jab nind se rishta tumhara Fir ek dafa mujhse jud jaaye ... Aur Mai Mil jaaun tumse Robaroo kuch iss kadar ham dono ho jaaye Kuch kehte raho tum , Mai dekhta rahu , sunta rahu tumko Naa baat koi aur ho , Na khayaal aur koi aaye ... Aur Mai Mil jaaun tumse Aur mai mil jaaun tumse.

मेरी आखरी साश पै तेरा ही नाम और होंटो पै तेरा ही जिकृ रह जाऐ और इस दिल ख्वहिंश पूरि हो जाऐ कि मेरी दम तेरी वाहो मे निकल जाऐ

Posted On: 09-01-2021

🦊जिस्म की खुशबू तो भेड़िये भी सूंघ लेते है और जिस्म को नोच डालते है काश कोई ऐसा मिले जो हमारे दिल की महक से खींचा चला आये जिस्म नोचने की जगह हमारी बिखरी ज़िंदगी सवार जाए❤