पापा ने
इतनी बडी दुनिया में एक छोटा सा आशियाना बनाया था पापा ने।
ऐसा लगता था कि धरती पर स्वर्ग का निर्माण कराया था पापा ने।
ज्यादा तो कुछ नहीं सिखाया था उन्होने मुझे।
पर कितने भी गम में मुस्कुराना सिखाया था पापा ने।
उनके तो उसी दिन सारे सपने टूट गए।
जब हम बड़ों की इज्जत छोटों का सम्मान करना भूल गए।
हा मैं गलत था अब यह अहसास कर रहा हूं।
खुद को बदलने की कोशिश कर रहा हूं।
हा मुझे यकीन है मैं खुद को बदल दुंगा।
जो सपने सजाए थे खुली आंखों में पापा ने।
वो सारे सपने मै हकीकत में बदल दुंगा।
बड़ों का आशीर्वाद और छोटों का सम्मान बना रहे मेरे साथ।
वो टूटा हुआ घर मैं फिर से पापा का वही स्वर्ग बना दुंगा।