इक आईना है जो चेहरा देख के जल उठता है,
एक किताब है जो कहानी खुद की बताती है,
इक ऐसी जिंदगी है ना ख्वाब अच्छे आते हैं
ना नींदें वफ़ा दिखाती है~
रविकांत मिश्रा
(बी.ए एल एल.बी)
गोरखपुर विश्वविद्यालय
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