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रविकांत मिश्रा

Gorakhpur

Professional JP lenders & com.

Graduate Gorakhpur university

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Writer’s notebook

The writing of रविकांत मिश्रा

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6 piecesLatest published writing · Page 1
Life Quotes
इक आईना है जो चेहरा देख के जल उठता है, एक किताब है जो कहानी खुद की बताती है, इक ऐसी जिंदगी है ना ख्वाब अच्छे आते हैं ना नींदें वफ़ा दिखाती है~ रविकांत मिश्रा (बी.ए एल एल.बी) गोरखपुर विश्वविद्यालय
Sad Shayari
* तुमको लिखा * जो भी लिखा तुम्हें,कम लिखा तुमको खुशियां, खुद को गम लिखा खुद को कभी,तुम्हे हरदम लिखा खुद को ख़ंजर, तमको मरहम लिखा जितना भी लिखा तुमको,कम लिखा ।
Sad Shayari
#(5- अप्रैल शाम 9 बजे ,जब पूरा हिंदुस्तान दिया जला रहा है)# है बुझने को जिस्मे दिया यहां वो खुद अब रौशनी में जल रही होंगी तस्वीरें-कैद को अब,वो खूब मचल रही होंगी सूरज से सज़दे का हुनर तो जैसे आता ही नही उनको चंद तारों की बातों में अब वो बखूब फिसल रही होंगी
Sad Shayari
इक आधा बरष गुजरने को है, ये जिस्म बसर तन्हा मरने को है, है तूं चाँद किसी महफ़ूज छत की किसी की छत फ़क़त गिरने को है,
Sad Shayari
इक नाम जोड़ के बहुत शर्मिंदा हूं तूं नही मुझमे क्या फिर भी मैं जिंदा हूं जिंदगी यूं ही बसर गुजर जाएगी तन्हा मैं जो हौशलों के छत का बासिन्दा हूं ।
Sad Shayari
बस एक बेबाक हुनर कर गया हूँ मैं सबके दिल से अब उतर गया हूं मैं मुस्कराएं किस वजह को कोष के सुन रहा तेरे घर गया हूँ मैं बोलू क्या,मैं मर भी नही पाता जीते-जी जबसे मर गया हूँ मैं लोग मलते हैं हाँथ अपनी की कैसे जिंदा हूं पर मर गया हूँ मैं ।

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