मुख परस्ती से क्या हमें अब आजाद कर दोगे, मैं कुछ लाया हूं घर से क्या तुम स्वाद भर दोगे। अरविंद जिद्दत से चाहा है तुझे बदलते जमाने में, मुझे जीना या मरना है क्या यही इंसाफ कर दोगे।।
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