मुख परस्ती से क्या हमें अब आजाद कर दोगे,
मैं कुछ लाया हूं घर से क्या तुम स्वाद भर दोगे।
अरविंद जिद्दत से चाहा है तुझे बदलते जमाने में,
मुझे जीना या मरना है क्या यही इंसाफ कर दोगे।।
Writer’s notebook
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हर खुशनुमा माहौल को तुम शबनम-ए-शाम मत कहना,
कहीं मिल जायो जो धोखा उसे प्यार का अंजाम मत कहना।
हर शख्श की एक ही चाहत है कुछ अच्छा पा लूँ इस जहाँ में,
चुपचाप अपना लेना गमों को मौत को सलाम मत कहना।।
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