खो दिया सब ,
न जाने पाया है काया,
तुम्हे खो के लगा ,
जिंदगी में और कुछ न रहा
अब खुद को ढूंढ ता हूँ
दुनिया के भीड़ में
पाती हूँ खुद को में
मेरे आंसू के बरसात में I
लोपामुद्रा
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