बस एक बेबाक हुनर कर गया हूँ मैं
सबके दिल से अब उतर गया हूं मैं
मुस्कराएं किस वजह को कोष के
सुन रहा तेरे घर गया हूँ मैं
बोलू क्या,मैं मर भी नही पाता
जीते-जी जबसे मर गया हूँ मैं
लोग मलते हैं हाँथ अपनी
की कैसे जिंदा हूं पर मर गया हूँ मैं ।
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