#(5- अप्रैल शाम 9 बजे ,जब पूरा हिंदुस्तान दिया जला रहा है)#
है बुझने को जिस्मे दिया यहां
वो खुद अब रौशनी में जल रही होंगी
तस्वीरें-कैद को अब,वो खूब मचल रही होंगी
सूरज से सज़दे का हुनर तो जैसे आता ही नही उनको
चंद तारों की बातों में अब वो बखूब फिसल रही होंगी
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