जहा छोड़ कर गए थे वही छूटे जा रहे है।
ऐसा नही मोती चमकते नही पर जितने चमकते है उतने टूटे जा रहे है।
हम शांत है पर सवाल है मन के भवसागर जो बार बार कूद से पूछे जा रहे है?
गलती क्या थी हमारी जो टूटे जा रहे है।।
मयंक त्यागी
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