एक किनारा हूं मैं
बहती रहे नदी प्रेम की जिसमें
दूजा किनारा मुझे वो तुम चाहिए
चलोगे संग अनंत तक,
बिखरोगे नही तुम,किसी मोड़ पर
वादा ये मुझे तुमसे चाहिए
बुराइयां कुछ तुम समा लेना
कुछ में समा लूंगा
आब प्रेम का दूषित नही होना चाहिए
सूख भी जाए नदिया,
अपनो की हरियाली में
बस दुआ इतनी ही करना
बहने लगे कल कल आब फिर,
इतनी वर्षा जरूर होनी चाहिए
Writer’s notebook
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कोई खास नही,
पर है अपनो सा लगाव
नाम नही इस रिश्ता का,
मगर प्यार है बेहिसाब
खुशी छोटी ही क्यों न हो,
मगर जश्न का ना है हिसाब
गैरो के गम को भी अपना बनाकर
ये भी करते है विलाप
मुश्किल कितनी ही बड़ी क्यो न हो,
रहती हमेशा दिल में एक आश
कोई साथ हो या न हो
बस ये दोस्त ही है जो रहते है हमेशा साथ
ये दोस्त भी क्या लाज़वाब होते है,
और इनकी दोस्ती भी उतनी ही लाजवाब
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