"यह धरा कितनी बड़ी है ,एक तुम क्या एक मैं क्या ?
दृष्टि का विस्तार है यह ,अश्रु जो गिरने चला है ,
राम से सीता अलग हैं ,कृष्ण से राधा अलग हैं ,
नियति का हर न्याय सच्चा ,हर कलेवर में कला है..!"
Writer’s notebook
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“शहर जाकर तुझे बस रात की शोखी हुई हासिल,
मैं अपने गाँव की इक शाम तेरे नाम करता हूँ...!”❤️

"ये मेरे हाथ में जो फूल का गुलदस्ता है,
ये मेरे पाँव के काँटों पे बहुत हँसता है..!" ??
हंसकर भी देख लिया रोकर भी देख लिया
किसी को पाकर और खोकर भी देख लिया
जिंदगी वही जी सकता है जो अकेले जीना सीख लिया ??????????

इज्जत दोगे तो इज्जत पाओगे,
अकड़ दिखाओगे तो हमारा कुछ नहीं उखाड़ पाओगे !

मत पूछ मेरी पहचान मै तो भष्मधारी हू! अंगार से होता है जिनका क्षृ़ंगार मै उस महाकाल का पुजारी हू!

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