घूम आया शहरों की हर गलियों में
पर सुकून कहीं नहीं मिला
दोस्त तो बहुत मिले
पर अपना कोई नहीं लगा
आया जब लौट कर
वापस गांव की गलियों में
सुना गुनगुनाते भवरों को कलियों में
तब जाकर एहसास हुआ
गांव के देस्तों का आभास हुआ
Writer’s notebook
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हर मोड़ पर मुकाम नही होता,
दिल के रिश्ते का कोई नाम नही होता,
चिरागों की रोशनी से ढुंढा है आपको,
आप जैसा दोस्त मिलना आसान नही होता....
Written by Er.Prashant Ranjan
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