तेरी चांद उगलती बातों का असर रौशनी निगलती मेरी आंखों ने जाना और क्या से क्या हो गया। नहीं मालूम कि मेरे कुछ निकम्में ख़्वाबों के पंख बन कर तुम्हें क्या मिला होगा, पर जानता हूं कि अगर कोई ख़ुदा है तो अपना सारा काम ख़ुद से नहीं करता। अच्छा लगा खुशबू के पांव पहन कर तेरा आना मेरे एहसासों में ,जिसके कारण मेरी महकती लंबी सांसों ने बता दिया कि ज़िंदगी दो कदम पीछे भी थी और दो कदम आगे भी।
Writer’s notebook
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