एक नये सफर पर चलना हे,
और खुद को खोजना हे,
खुल के जिना हे,
अपना हर फेसला खुद लेना हे,
अपने सर्तों पे जिना हे,
चाहे कोई कुछ भी कहे,
क्यूंकि ये मेरी जिंदगी हे दुख हो या सूख,
सब कुछ मुझे झेलना हे,
लोगों की परवा नहीं करना हे,
क्यूंकि जिंदगी बहुत छोटी हे,
जिसमे अनगिनत मौके हें,
जिसे मुझे हर्किज़ नही गवाना हे।
Writer’s notebook
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मेरा आना..मेरा जाना..यूं ही नहीं है
तुझे देखकर मुस्कुराना यूं ही नहीं है
यूं तो गुजरता हूं कई रास्तों से लेकिन
तेरी गली में ठिकाना....यूं ही नहीं है
Shivkumar barman ✍️
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