न समझ मैं भूल गया हूँ तुझे,
तेरी खुशबू मेरे सांसो में आज भी हैं ।
मजबूरियों ने निभाने न दी मोहब्बत,
सच्चाई मेरी वफाओ में आज भी हैं ।
Writer’s notebook
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वो मोहब्बत भी तेरी थी, वो नफ़रत भी तेरी थी
वो अपनाने और ठुकराने की अदा भी तेरी थी
मै अपनी वफ़ा का इंसाफ़ किस से माँगता..
वो शहेर भी तेरा था, वो अदालत भी तेरी थी......
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