कास में समंदर की लहरें होता
और तू होती गंगा की धारा
प्यास बुझाने को तू मेरी
छोड़ आती अपना किनारा
जो तू कर ले निश्चय खुद से खुद में मिलने को
क्या हस्ती खड़ा हिमालय रोक सके तुझको
आ भर दे तू मुझको उतर मेरी गहराई में
तू मेरी भरने की वजह बन मैं बनू तेरा किनारा
आ बुझा जा तू मेरे प्यास को
ले अपने प्रेम रस धारा
काश मैं समंदर की लहरें होता
और तुम होती गंगा की धारा
Writer’s notebook
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