क्या दू में अपने चाहत का नजराना
फकीर जो तूने बना दिया एक दिल बचा है
इस सीने में ला खंजर दू निकाल मै तेरी हथेली पे
Writer’s notebook
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कास में समंदर की लहरें होता
और तू होती गंगा की धारा
प्यास बुझाने को तू मेरी
छोड़ आती अपना किनारा
जो तू कर ले निश्चय खुद से खुद में मिलने को
क्या हस्ती खड़ा हिमालय रोक सके तुझको
आ भर दे तू मुझको उतर मेरी गहराई में
तू मेरी भरने की वजह बन मैं बनू तेरा किनारा
आ बुझा जा तू मेरे प्यास को
ले अपने प्रेम रस धारा
काश मैं समंदर की लहरें होता
और तुम होती गंगा की धारा
दोस्तों की महफिल में बैठे हम सारे गम भुला गए
गिरते थे जो हम हाथ पकड़ संभलना सिखा गए
वह दोस्त ही तो थे जो हमें वह जीना सिखा गए
पीते थे खुद ओ बियर हमको सोडा पिला गए
पार्टी तो देते थे अपने नाम के पर बिल हमारे नाम पड़ गए
लगा जो चोट मुझे कभी दर्द उनको होता था
रोता हूं जो मैं कभी उनकी आंखों से आंसू बहता था
ए दोस्त तो ही है जो हमको गमों में हंसना सिखा गए
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