ज़ख़्म इतने गहरे हैं इज़हार क्या करें, हम खुद निशाना बन गए वार क्या करें, मर गए हम मगर खुली रही ये आँखें, इससे ज्यादा उनका इंतज़ार क्या करें।
Writer’s notebook
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पत्थरों को खुश करने के लिए फूलो का कत्ल कर आए हम ।
जहा आए थे अपने पाप मिटाने वहां एक और पाप कर आए हम ।
आशु आ जाते है रोने से पहले ।
ख्वाब टूट जाते है सोने से पहले।
लोग कहते है मोहब्बत गुनाह है,
काश कोई रोक लेता यह गुनाह होने से पहले।
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