राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में 12 मार्च 1930 को संपूर्ण स्वाधीनता के लिए 'सविनय अवज्ञा' के नाम से एक आंदोलन की शुरुआत हुई थी।
उस आंदोलन के पुनर्स्मरण हेतु आज आदरणीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के मार्गदर्शन में साबरमती आश्रम से 'पदयात्रा' प्रारंभ हुई है।
मेरा सौभाग्य है कि आज मैं भारत माता के महान सपूतों को .विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए 'आजादी का अमृत महोत्सव' से संबंधित कार्यक्रम के साथ जुड़ रहा हूं।
यह महोत्सव युवा पीढ़ी को स्वाधीनता आंदोलन का स्मरण कराते हुए उन्हें चुनौतियों से जूझने के लिए नई प्रेरणा व ऊर्जा प्रदान करेगा।
Writer’s notebook
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नाम उन्हीं का होता है जो "बस्ती' से निकलकर "हस्ती' बन जाते हैं!??
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Bulbulo ke Pankho mein bandhe hue kabhi Baaz nahi rehte
Buzdilo aur Kayaro ke Haath Kabhi Raaz Nahi Rehte
Ser Jhuka ke Chalne ki aadat pad jaaye jis Insaan Ko
Us Insaan ke Ser Per Kabhi Taaj Naahi Rehte
बीज बो दो फूल खिलकर चमन को बहार देंगे और दिशा दे दो ये नौजवान मिलकर राष्ट्र को सवार देंगे
दिल के तमाम ज़ख़्म तिरी हाँ से भर गए
जितने कठिन थे रास्ते वो सब गुज़र गए
जब से मिला है साथ मुझे आप का हुज़ूर
सब ख़्वाब ज़िंदगी के हमारे सँवर गए
आदमी होना ख़ुदा होने से बेहतर काम है
ख़ुद ही ख़ुद के ख़्वाब की ताबीर बन कर देख ले
अपने ही आप से इस तरह हुए हैं रुख़्सत
साँस को छोड़ दिया जिस सम्त भी जाना चाहे
उम्र की राह में जज्बात बदल जाते है।
वक़्त की आंधी में हालात बदल जाते है
सोचता हूं काम कर-कर के रिकॉर्ड तोड़ दूं।
कमबख्त सैलेरी देख के ख्यालात बदल जाते हैं
Dil Ka Sheesha Liye Ham Teri Talash Me Hain
Tu Aa Ja Jara PatThar Hi Marne Ke Liye
Teri Nazar Me Jane Main Kaisa Banda Hun
Aaina Tu Hi Hai Surat Niharne Ke Liye
Ye Dard Ka Bhanwar Dooba Na De Mujhko
De Apna Hath Badha Apne Deewane Ke Liye
Kayi Jazbat Hain Tumko Batane Ke Liye
Par Taraste Hain Teri Jhalak Pane Ke Liye
आखिर किसी मुकाम पर मेरे मंजिल का निशां होगा
तेरी ऊंगली थामे बिना वहां तक चल नहीं पाएंगे
बरसात के मौसम में शराबें तो पी ली हमने
क्या खबर थी भीगकर हम नशे में रह नहीं पाएंगे
ये करवटों के सिलसिले कभी खत्म हो न पाएंगे
तेरे बिन हम दिलजले कभी चैन नहीं पाएंगे
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