शायरी में कहाँ सिमटे है दर्द दोस्तों,,
बस दिल बहला रहे हैं काग़ज़ों के टुकड़ों से
Writer’s notebook
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ना जाने कितनी उम्मीदें मर चुकी हैं मेरे अन्दर,
अब तो मेरा दिल भी मुझे कब्रिस्तान सा लगता है.........
भरोसा टूटने की आवाज नही होती,
पर गूंज जिंदगी भर सुनाई देती है
सिमट सा गया मेरा प्यार कुछ अल्फाजों से,
जब उसने कहा मोहब्बत तो है पर तुमसे नही
किसी को अपनी जान से ज्यादा चाहने का इनाम,
आंसू और दर्द के अलावा और कुछ नही मिलता.
Log dard dene ke baad kehte h.......
Yaar....
Khush rehna
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