थक सा गया हूँ, खुद को सही साबित करते करते,
खुदा गलत हो सकता है, मगर मेरी मुहब्बत नहीं……!!!
Writer’s notebook
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कितने मसरूफ़ हैं हम जिंदगी की कशमकश में,
इबादत भी जल्दी में करते हैं फिर से गुनाह करने के लिए…...!!!
नींद को आज भी शिकवा है मेरी आँखों से,
मैंने आने न दिया उसको तेरी याद से पहले......!!!
चिराग कोई जलाओ की हो वजूद का एहसास,
इन अँधेरों में मेरा साया भी छोड़ गया मुझको......!!!
आपकी यादें भी हैं, मेरे बचपन के खिलौनो जैसी,
तन्हा होते हैं तो इन्हें ले कर बैठ जाते हैं….....!!!
टुकड़े पड़े थे राह में किसी हसीना की तस्वीर के,
लगता है कोई दीवाना आज समझदार हो गया है…....!!!
हमें तो प्यार के दो लफ्ज ही नसीब नहीं,
और बदनाम ऐसे जैसे इश्क के बादशाह थे हम......!!!
मुस्कराते रहो तो दुनिया आप के कदमों मे होगी,
वरना आसुओ को तो आखे भी जगह नही देती........!!!
मुझे नींद की इजाज़त भी उसकी यादों से लेनी पड़ती है,
जो खुद तो सो जाता है, मुझे करवटों में छोड़ कर......!!!
तेरे ही अक्स को तेरा दुश्मन बना दिया
आईने ने मज़ाक़ में सौतन बना दिया…....!!!
जिंदगी आ बैठ, ज़रा बात तो सुन,
मुहब्बत कर बैठा हूँ, कोई मशवरा तो दे.......!!!
आराम से कट रही थी तो अच्छी थी,
जिंदगी तू कहाँ इन आँखों की, बातों में आ गयी.....!!!
मुझे दुआएं दिल से मिली हैं,
कभी खरीदने को जेब में हाथ नहीं डाला…...!!!
कोशिश बहुत की, राज़-ए-मुहब्बत बयाँ न हो,
मुमकिन कहाँ था, आग लगे और धुआँ न हो..........!!!
ख्वाहिशों को जेब में रखकर निकला कीजिये जनाब,
खर्चा बहुत होता है, मंजिलों को पाने में.........!!!
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