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kamal gupta

New Delhi

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Writer’s notebook

The writing of kamal gupta

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90 piecesLatest published writing · Page 1
Shayari
मोहब्बत नहीं है क़ैद मिलने या बिछड़ने की​, ये इन खुदगर्ज़ लफ़्ज़ों से बहुत आगे की बात है।
Shayari
कितना वाकिफ थी वो मेरी कमजोरी से, वो रो देती थी, और मैं हार जाता था।
Shayari
गुमनामी का अँधेरा कुछ इस तरह छा गया है, कि दास्ताँ बन के जीना भी हमें रास आ गया है।
Shayari
अधूरी मोहब्बत मिली तो नींदें भी रूठ गयी, गुमनाम ज़िन्दगी थी तो कितने सकून से सोया करते थे।
Shayari
जिंदगी बड़ी अजीब सी हो गयी है, जो मुसाफिर थे वो रास नहीं आये, जिन्हें चाहा वो साथ नहीं आये।
Shayari
किताबें भी बिल्कुल मेरी तरह हैं अल्फ़ाज़ से भरपूर मगर खामोश।
Shayari
वो मुस्कान थी कहीं खो गयी, और मैं जज्बात था कहीं बिखर गया।
Shayari
मरना भी मुश्किल है जिस शख्श के वगैर, उस शख्स ने ख्वाबों में भी आना छोड़ दिया​।
Shayari
हम तो बने ही थे तबाह होने के लिए, तेरा छोड़ जाना तो महज़ बहाना बन गया।
Sharabi Shayari
परदा तो होश वालों से किया जाता है हुज़ूर, तुम बेनक़ाब चले आओ हम तो नशे में हैं।
Sharabi Shayari
लड़खड़ाये कदम तो गिरे उनकी बाँहों मे, आज हमारा पीना ही हमारे काम आ गया।
Sharabi Shayari
कभी देखेंगे ऐ जाम तुझे होठों से लगाकर, तू मुझमें उतरता है कि मैं तुझमें उतरता हूँ।
Friendship Shayari
गुनगुनाना तो तकदीर में लिखा कर लाए थे, खिलखिलाना दोस्तों से तोहफ़े में मिल गया।
Friendship Shayari
हम अपने आप पर गुरूर नहीं करते, किसी को प्यार करने पर मजबूर नहीं करते, जिसे एक बार दिल से दोस्त बना लें, उसे मरते दम तक दिल से दूर नहीं करते।
Friendship Shayari
एक ताबीज़ तेरी मेरी दोस्ती को भी चाहिए... थोड़ी सी दिखी नहीं कि नज़र लगने लगती है।

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